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Saturday, 27 August 2016

IAS बनने की चाह रखने वाले, जरूर पढ़ें...

IAS बनने की चाह रखने वाले, जरूर पढ़ें...
भारत के सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओ में से अव्वल हैं UPSC द्वारा कंडक्ट कराए जाने वाली सिविल सर्विसेस परीक्षाएं. इसकी तैयारी करने और इनमें सफल होने वाले स्टूडेंट अपनी रातों की नींद और दिन के चैन से समझौते करते हुए सफलता की देहरी चूमते हैं. ऐसे में इस बात की अहमियत बढ़ जाती है कि कोई क्या पढ़ता है, कहां पढ़ता है और कौन सी भाषा पर पकड़ बनाए रखता है. इसी के मद्देनजर हम खास आप सभी के लिए UPSC की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स और प्रतिभागियों के आंकड़े लाए हैं. इन आंकड़ों को देख कर आप अपनी तैयारी को इस दिशा में मोड़ सकते हैं और अपेक्षित रिजल्ट हासिल कर सकते हैं..

दिल्ली में होने के फायदे...
दिल्ली यूनिवर्सिटी सबसे ज्यादा अधिकारियों को IAS अकादमी भेजती है. हर 10 में से 1 IAS प्रोबेशनरी ऑफिसर दिल्ली यूनिवर्सिटी का छात्र होता है. मसूरी पहुंचने वाले प्रोबेशनरी ऑफिसरों में दिल्ली की हिस्सेदारी 23 फीसद है.

शीर्ष पांच संस्थान व यूनिवर्सिटी...
दिल्ली यूनिवर्सिटी
कुल दावेदार- 211
चुने गए- 95
अन्ना यूनिवर्सिटी
कुल दावेदार- 128
चुने गए- 46
सावित्रीबाई फूले
कुल दावेदार- 105
चुने गए- 43
IIT कानपुर
कुल दावेदार- 69
चुने गए- 32
IIT दिल्ली
कुल दावेदार- 91
चुने गए- 32

विदेश से पढ़ने के भी हैं फायदे...
विदेशी यूनिवर्सिटी से पढ़ने पर IAS बनने के चांस में इजाफा हो जाता है.
अमेरिका से कुल दावेदार- 18
सफल- 11
ब्रिटेन (ऑक्सफोर्ड, कैम्ब्रिज और डरहम)- 10
सफल- 7
स्विट्जरलैंड- 2
सफल- 2
जर्मनी- 2
सफल- 2

डॉक्टरों की यहां कम चलती है...
अब आंकड़े तो ऐसी ही गवाही देते हैं. इंटरव्यू देने वाले दावेदारों में डॉक्टरों की तादाद काफी होती है लेकिन वे फाइनल रिजल्ट तक कम पहुंच पाते हैं.
मेडिकल बैकग्राउंड- कुल 1481
सफल- 1295
इंजीनियरिंग- 427
सफल- 396
साइंटिफिक और टेक्निकल- 330
सफल- 319
नॉन टेक्निकल- 306
सफल- 293

इंजीनियरिंग का बोलबाला
साल 2013-14 में सफल उम्मीदवारों पर एक नजर डालें तो इंजीनियरों की कामयाबी दर में सबसे अधिक सुधार हुआ है.
साल 2012-13 में अनुपात - साल 2013-14 में अनुपात
इंजीनियर- 0.79                - 0.93
मेडिकल- 0.75                 - 0.87
साइंटिफिक और टेक्निकल- 0.92  - 0.97
नॉन टेक्निकल- 0.97           -0.96
सभी पद- 0.87                -0.91

अंग्रेजी को मिलती है वरीयता...
हम हिन्दी या फिर तमाम क्षेत्रीय भाषाओं को लेकर चाहे जितना शोर मचाते हों लेकिन हकीकत कुछ और ही है.
10 में से 9 दावेदार पर्सनैलिटी टेस्ट में अंग्रेजी बोलने को तरजीह देते हैं.
कुल 3001 दावेदारों में से 2672 ने अंग्रेजी चुनी. वहीं 329 दावेदारों ने क्षेत्रीय भाषाओं को चुना.
हिंदी- 222, मराठी- 46, गुजराती-32, तमिल-8, पंजाबी-7, मलयालम-6, कन्नड़-3, तेलगु-2, बंगाली-1, उर्दू-1, मैथिली-1.
पुरुषों की तुलना महिलाएं ज्यादा सफल...
अगर आंकड़ों के आईनों से देखें तो महिलाएं जहां दूसरे प्रयास में सफलता की देहरी चूमती हैं वहीं पुरुषों को ऐसा करने में तीन प्रयास लग जाते हैं.
सौजन्य- Newsflicks

क्या PMO के पास नहीं सबसे गरीब को पहचान करने की शक्ति, सबसे गरीब 100 लोग नहीं खोज पाया PMO, टीचर की सहायता राशि लौटाई

क्या PMO के पास नहीं सबसे गरीब को पहचान करने की शक्ति, सबसे गरीब 100 लोग नहीं खोज पाया PMO, टीचर की सहायता राशि लौटाई


देश में सबसे गरीब कौन है? आखिर इसकी पहचान कैसे हो सकती है. राजस्थान के एक रिटायर्ड टीचर ने प्रधानमंत्री दफ्तर को एक लाख रुपए की सहायता राशि भेजकर कहा कि इस राशि को देश के सबसे गरीब 100 लोगों की पहचान कर उनमें से किसी एक को दे दी जाए.

लेकिन, प्रधानमंत्री दफ्तर ने इसे प्रधानमंत्री कोष में जमा करवा दिया. मगर जब इन्होने कहा कि प्रधानमंत्री कोष में नहीं वो किसी सबसे गरीब को ये पैसा देना चाहते हैं तो पीएमओ ने इनका चेक ये कहते हुए लौटा दिया कि देश में सबसे गरीब की पहचान करने का कोई तरीका नहीं है.
देश की सरकार को ये पता नहीं है कि देश में सबसे गरीब 100 लोग कौन हैं और न हीं वो ये पता चला सकती है. ये जवाब प्रधानमंत्री कार्यालय ने राजस्थान के सीकर के दातारामगढ़ के सीनियर सेकेंडरी स्कूल के रिटायर्ड शिक्षक दीपचंद शर्मा को लिखा है. दीपचंद शर्मा ने पहले तो आरटीआई के तहत मुख्य सूचना आयुक्त के दफ्तर से देश के 100 गरीबों की लिस्ट चाही जिसका जवाब उन्हें नहीं आया.
फिर इन्होंने एक लाख की अपनी तनख्वाह की बचत राशि प्रधानमंत्री कार्यालय को एक चिट्ठी के साथ भेज दी कि देश के सबसे ज्यादा किसी गरीब को ये वो राशि दे दें और उसका नाम बता दें ताकि वो उसका आगे भी देखभाल कर सकें. लेकिन, प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस राशि को प्रधानमंत्री राहत कोष में जमा कर लिया और उसकी रशीद इन्हें भेज दी.
जब ये नाराज हुए कि प्रधानमंत्री कोष में तो उद्योगपति पैसा डाल हीं रहे हैं तो मेरा पैसा क्यों डाला? जब हमने देश के सबसे गरीब व्यक्तियों में से किसी को देने को कहा था. तो पीएमओ ने फोन कर कहा कि हम गरीब को ही दे देते हैं. राशि लेकिन हम गरीब का नाम नहीं बता सकते. शर्मा जब जिद पर अड़ गए तो उन्होंने एक लाख रुपए का इनका ड्राफ्ट बनाकर पैसा लौटा दिया.
दीपचंद को 13000 रु. की मीसा पेंशन इमरजेंसी में जेल जाने की वजह से और 18000 की पेंशन शिक्षक की बरसों की नौकरी की वजह से मिलता है. नाराज शर्मा ने मुख्य सूचना आयुक्त के यहां मुकदमा दर्ज किया है कि मेरा पैसा प्रधानमंत्री कोष में बिना पूछे क्यों जमा करवाया? इसके लिए पीएमओ दंड दे.
लेकिन मुख्य सूचना आयुक्त को पीएमओ ने लिखा है कि किसी ने शर्मा की चिट्ठी को ठीक से पढ़ा नहीं और उसका अर्थ नहीं समझ पाया. अब शर्मा का पैसा लौटा दिया गया है इसलिए इस मामले को खत्म कर दिया जाए. लेकिन शर्मा का कहना है कि 30 दिन के अंदर पीएमओ ने जवाब नहीं दिया कि उन्होंने सबसे गरीब व्यक्ति का पैसा प्रधानमंत्री कोष में क्यों जमा करवाया?
शर्मा जवाब नहीं मिलने की वजह से नियमों के तहत पीएमओ से जुर्माना चाहते हैं. पीएमओ की तरफ से इन्हें बताया गया कि फोर्ब्स अमीरों की लीस्ट तैयार करती है लेकिन गरीबों की कोई सूची नहीं है. फोर्ब्स के अनुसार 84 भारतीय सबसे अमीर है जिसमें 58 साल के रिलायंस कंपनी के चेयरमैन मुकेश बानी 19.3 बिलियन डॉलर के साथ पहले नंबर पर हैं.
2012 के सरकारी आंकड़ों के अनुसार 363 मिलियन लोग गरीब हैं यानि देश की जनसंख्या के करीब 29.5 फीसदी गरीब हैं जो दुनिया में सबसे ज्यादा हैं. शर्मा के बेटे-बेटी दिल्ली में टीचर हैं और पूरे परिवार को गीता याद है. ये दान का काम करते रहते हैं.